Wednesday, 16 January 2013




                         नेता ही नहीं 'लीडर' भी 
अटल बिहारी वाजपेयी ,भारतीय राजनीति में एक ऐसा नाम जिसने सदैव दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम किया। देश के वर्तमान प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह ने जिसे भारतीय राजनीति का ‘भीष्म पितामाह’ कहा तथा भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता ने जिसे ‘युग पुरुष’ की संज्ञा दी है । भारतीय राजनीति में कुछ ही नाम ऐसे हैं जिनका राजनीतिक जीवन बेदाग रहा है और उन्हें चिरकालीन समय तक उनके योगदान के लिए याद किया जाएगा अटल जी उनमें अग्रणी हैं।

अटल जी -एक प्रखर वक्ता 
     25 दिसंबर 1925 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जन्मे अटल जी बचपन से ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे । कॉलेज का दिनों से ही राजनीति में सक्रीय भूमिका निभाई और 19 ग्वालियर में छात्र संगठन के उपाध्यक्ष भी चुने गए । पहले वकालत फिर पीएच.डी.की पढ़ाई छोड़ कर अटल जी ने पत्रकारिता को अपना पेशा बनाया । उन्होने लखनऊ से प्रकाशित राष्ट्रधर्म ,स्वदेश, पाँचजन्य और  दिल्ली से प्रकाशित वीर अर्जुन दैनिक पत्र का संपादन भी किया । राजनेता से पहले अटल जी को एक पत्रकार और कवि के रुप में जाना जाता है ।

राजनीतिक जीवन
 अटल जी कॉलेज के दिनों से ही राजनीति में सक्रीय रहे हैं। जब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने भारतीय जनसंघ का गठन किया जो राजनीतिक विचारधारा वाला दल था। भारतीय जनसंघ का जन्म संघ परिवार की राजनीतिक संस्था के रूप में हुआ, जिसके अध्यक्ष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे। अटल जी उस समय से ही इस संस्था के संगठनात्मक ढाँचे से जुड़ गए। तब वह अध्यक्ष के निजी सचिव के रूप में दल का कार्य देख रहे थे। इस कारण उन्हें जनसंघ के सबसे पुराने व्यक्तियों में एक माना जाता है। भारतीय जनसंघ ने 

नेता ही नहीं 'लीडर' भी 
सर्वप्रथम 1952 के आम चुनावों में भाग लिया लेकिन चुनावों में भारतीय जनसंघ को कोई विशेष कामयाबी प्राप्त नहीं हुई  1953 में जब डॉ. मुखर्जी की जेल में ही मृत्यु हो गई। तब भारतीय जनसंघ का काम अटल जी प्रमुख रूप से देखने लगे।1957 के आम चुनावों में भारतीय जनसंघ अटल जी के नेतृत्व चार स्थानों पर विजय प्राप्त हुई। अटल जी पहली बार बलरामपुर सीट से विजयी होकर लोकसभा में पहुँचे। उसके बाद लगातारअटल जी नौ बार लोकसभा और दो राज्यसभा में चुनकर गए। 1977 में छठी लोकसभा में जब जनता पार्टी की सरकार बनी तब उन्हें देश का विदेश मंत्री बनाया गया । आपातकाल के दौरान अटल जी जेल में रहे ।1980 में जब जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी का उदय हुआ तब अटल जी पार्टी के सबसे शीर्ष नेताओं में से एक थे । अटल जी पहली बार 16 मई 1996 को तेरह दिनों तक प्रधानमंत्री रहे ।दूसरी बार अटन जी अप्रेल 1999 में 13 माह के लिए प्रधानमंत्री रहे और तीसरी बार उन्हें अक्टूबर 1999 में प्रधानमंत्री बनाया गया 2004 में अटल जी ने अपने कार्यकाल को पूरा किया । अटल जी के पास 40 वर्षों से ज्यादा का संसदीय अनुभव है जो राजनीति में उनकी अपार ख्याति को दर्शाता है।



क्यों याद किया जाता है अटल जी को
·         श्री अटल जी ने संतुलित विदेश नीति का पालन करते हुए अपनी परमाणु नीति को स्पष्ट किया। अमेरिका और उसके मित्र देशों ने 11 मई 1198 को हुए पोखरण परमाणु परीक्षण पर आँखें अवश्य दिखाई लेकिन अटलजी ने स्पष्ट कर दिया कि भारत अगला परमाणु परीक्षण नहीं करेगा। वह परमाणु बम का उपयोग तभी करेगा जब उसके विरुद्ध ऐसा किया जाएगा। भारतीय परमाणु कार्यक्रम चीन तथा पाकिस्तान के विरोधी रवैये को देखते हुए बनाया गया और सारी दुनिया भी भारत के इस भय को समझती थी।
·         आर्थिक विकास के लिए अटलजी ने 'स्वर्णिम चतुर्भुज' योजना का आरम्भ किया। इसके अंतर्गत वह देश के महत्वपूर्ण शहरों को लंबी-चौड़ी सड़कों के साथ जोड़ना चाहते थे । इसका अधिकांश कार्य अटलजी के कार्यकाल में पूर्ण हुआ। इससे जहाँ आम व्यक्ति की यात्रा सुविधाजनक हुई, वहीं व्यापारिक और क़ारोबारी गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिला।

·         अटलजी ने पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ सम्बन्ध सुधारने की दिशा में सदैव पहल की,यद्यपि पाकिस्तान ने कभी भी अपने वादों को पूर्ण नहीं किया। कारगिल युद्ध इसका स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने पाकिस्तान के सैनिक शासक परवेज मुशर्रफ़ से भी बातचीत की थी। अटल जी ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ को आगरा में शिख़र वार्ता के लिए आमंत्रित किया।

·         अटलजी ने प्रधानमंत्री के रूप में 'ब्रेन ड्रेन' ( युवा प्रतिभाओं में विदेश गमन की अभिरुचिबताई। उन्होंने युवाओं का आह्वान को रोकने की ज़रूरत ( किया कि वे मातृभूमि की सेवा पर ध्यान दें।
·         परमाणु बम बना लेने के कारण अमेरिका और उसके मित्र राष्ट्रों ने भारत पर प्रतिबंध लगा दिया। लेकिन अटलजी ने प्रतिबंधों की परवाह न करते हुए भारत को स्वावलम्बी राष्ट्र बनाने की दिशा में कार्य किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कह दिया कि भारत की अर्थव्यवस्था मज़बूत है और उन्हें आर्थिक प्रतिबंधों की कोई भी परवाह नहीं है।
·         अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिटंन के भारत आगमन पर अमेरिका के साथ भारतीय सम्बन्धों को सुधारने की दिशा में कार्य किया गया। अटलजी ने पाकिस्तान के अपदस्थ प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ की रिहाई के लिए बिल क्लिंटन से वार्ता की ताकि पड़ोसी देश में प्रजातंत्र की हत्या न हो सके। इस साझा प्रयास से ही नवाज शरीफ़ की रिहाई सम्भव हो सकी।

·         अयोध्या स्थित 'रामजन्म भूमि' पर मन्दिर बनाए जाने का भी मुद्दा था। यद्यपि अटल जी उस सीमा तक भाजपा के साथ माने जाते हैं, जहाँ तक हिन्दू राष्ट्र का सवाल आता है, लेकिन वह जन भावनाएँ भड़काने की नीति के समर्थक कभी भी नहीं रहे।
·         4 अक्टूबर 1977 को उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ के अधिवेशन में हिन्दी में सम्बोधन दिया। इसके पूर्व किसी भी भारतीय नागरिक ने राष्ट्रभाषा का प्रयोग इस मंच पर नहीं किया था। उनके इस भाषण को पूरी दुनिया में सराहा गया ।
·         अटल जी बंग्लादेश के साथ भी गंगाजल के वितरण पर समझौते की दिशा में बढ़े। उन्होंने तत्कालीन फ़ौजी शासक जिया-उल-हक़ से वार्तालाप के दौरान 'फ़रक्का-गंगाजल' बंटवारे का मसौदा तय किया। इसके अतिरिक्त भारत और पाकिस्तान के मध्य रेल सेवा की बहाली भी तय की गई।
उपरोक्त उदाहरणों यह बात साफ तौर पर सिद्ध होती है कि अटल जी का भारतीय राजनीति में समग्र योगदान है ।देश की राजनीति में आज के समय में जब राजनेता हर तरह से अपनी छवि खोते जा रहे हैं अटल जी जैसे नेतीओं की जरुरत है जो देश की चरमराती लोकतांत्रिक व्यवस्था के खेवनहार बन सकें |    
धन्यवाद ... 
''समग्र अटलजी परियोजना'' द्वारा पुरस्कृत निबन्ध ।

 विषय - भारतीय राजीनीति  में अटल जी का योगदान 




1 comment:

  1. बधाई हो, शीर्षक ठीक जगह लिखा करो।

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