'हैप्पी 100 हरभजन'
हरभजन के सितारे भले ही अभी गर्दिश में क्यों न हो लेकिन इस खिलाड़ी ने कई बार देश को गर्व करने के मौके दिए है । अपना सौवां टेस्ट मैच खेल रहे हरभजन की खासियत है कि वो विकेट गुच्छों में लेते हैं जिस दिन भज्जी की फिरकी चलती है उस दिन विरोधी टीम ताश के पत्तों की तरह ढहती नजर आती है । अपने टेस्ट कैरियर की शरुआती दिनों में भज्जी टीम के नियमित गेंदबाजों में शामिल नहीं थे क्योंकि तब कुंबले टीम के स्पिन अटैक की अगुआई करते थे । टीम में मिले मौकों को भुनाते हुए भज्जी आगे बढ़े और 400 विकटों का पहाड़ जैसा आकड़ा भी पार किया ।
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टर्बनेटर के नाम से मशहूर भज्जी 100 टेस्ट खेलने वाले देश के दसवें खिलाड़ी हैं । मौजूदा भारतीय खिलाड़ियों में भज्जी के अलावा यह रिकार्ड सचिन और सहवाग के नाम है । आस्ट्रेलिया के खिलाफ हरभजन का रिकार्ड और भी बेहतर है 2001 का वह कोलकाता टेस्ट शायद ही कोई खेल प्रेमी भुला पाया हो जब हरभजन के 13 विकटों की मदद से भारत ने फ़ॉलोआन के बाद आस्ट्रेलिया को हराया था । उस पूरी सीरीज में भज्जी ने 32 विकेट झटके थे और 'मैन आफ द सीरीज' भी रहे । एक दौर ऐसा भी था जब इस फिरकी गेंदबाज ने अपने परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए क्रिकेट छोड़कर विदेश में ट्रक चलाने का फैसला कर लिया था । लेकिन शायद कुदरत को कुछ और ही मंजूर था और वो आज हमारे सामने है ।
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| 'हरभजन टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक, लेने वाले पहले भारतीय गेंदबाज है |
बीते कुछ सालों में भज्जी की गेंदबाजी में शायद वो पैनापन न नजर आता हो लेकिन यह खिलाड़ी थक कर हार मानने वालों में से कतई नहीं है । मौजूदा आस्ट्रेलिया दौरा भज्जी की अग्निपरीक्षा साबित हो सकता है जब युवा गेंदबाजों की लम्बी फौज टीम में आने के लिए आतुर खड़ी है तब इस अनुभवी खिलाड़ी को अपना दम-ख़म दिखाना ही पड़ेगा । ये दौर टीम में बदलावों के लिए जाना जायेगा अभी हाल ही में राहुल द्रविड़ ,लक्ष्मण ने क्रिकेट को अलविदा कहा है और सचिन वनडे से पहले ही संन्यास ले चुके हैं इस दौर में किसी खिलाड़ी बिना बेहतर प्रदर्शन किए टीम में टिक पाना मुश्किल है । कंगारू टीम शुरू से ही भज्जी का पसंदीदा शिकार रही है इसे अपने घर में हराना भज्जी की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि वह दोबारा से टीम में अपना खोया हुआ स्थान प्राप्त कर सकें ।
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